
द्वारा – डॉ श्यामलेंदु , एडिटर ,द जनपथ दिल्ली
चुनाव भी संपन्न हुआ और सरकारें भी बन गयी। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में दो मोर्चों पर इतिहास रचा गया है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी – भाजपा को पहली बार भारी बहुमत मिला, वहीं तमिलनाडु में नवोदित पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम – टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं, अन्य विधानसभा चुनावों में असम और पुद्दुचेरी में मौजूदा सरकारें फिर से चुनी गईं, जबकि केरलम् में नई सरकार का चुनाव हुआ। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 206 सीटें जीतकर विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया और टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण – एसआईआर के बाद हुए पहले चुनाव में टीएमसी काफी पीछे रह गई और केवल 80 सीटें जीतकर एक सीट पर बढ़त हासिल करने में कामयाब रही। कुल 293 विधानसभा सीटों में से 292 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी -एजेयूपी को दो-दो सीटें मिलीं, जबकि सीपीआई एम ने एक सीट जीती। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतिष्ठित भवानीपुर सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से 15 हजार से अधिक वोटों से हार गईं। और इस तरह अरविन्द केजरीवाल , राहुल गाँधी , शीला दीक्षित की श्रेणी में शामिल हो गईं। अधिकारी ने नंदीग्राम सीट भी जीत ली। 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में ऐसी पार्टी की सरकार बनने जा रही है जो केंद्र में भी सत्ता में है। जीत हासिल करने वाले प्रमुख भाजपा उम्मीदवारों में आसनसोल दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से अग्निमित्रा पॉल और भातर सीट से करफा सौमेन शामिल हैं। पार्टी की उम्मीदवार और संदेशखाली हत्याकांड की पीड़िता रेखा पात्रा ने हिंगलगंज निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। भाजपा उम्मीदवार सुब्रता मैत्र ने बहरमपुर सीट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया। दूसरी ओर, टीएमसी के रेयार हुसैन सरकार ने भगवांगोला सीट से जीत दर्ज की है।आम जनता उन्नयन पार्टी -एजेयूपी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजिनगर दोनों सीटें जीत ली हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए मतदान पिछले महीने की 23 और 29 तारीख को दो चरणों में हुआ था। सरकार बनाने के लिए 148 सीटों के साधारण बहुमत की आवश्यकता थी । पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हुए मतदान में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ, जो स्वतंत्रता के बाद से सबसे अधिक है।मतलब एसआइआर ठीक था। मगराहाट पश्चिम विधानसभा के 11 बूथों और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के चार बूथों पर 2 मई को पुनर्मतदान हुआ, जबकि चुनाव आयोग ने पड़ोसी फलता निर्वाचन क्षेत्र में मतदान रद्द कर दिया। आयोग ने बड़ी संख्या में बूथों पर मतदान के दौरान गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का हवाला दिया। इस सीट पर नए सिरे से मतदान इस महीने की 21 तारीख को होगा और मतगणना 24 मई को होगी।2021 के चुनावों में, टीएमसी ने 215 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने 77 और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और आईएसएफ ने एक-एक सीट जीती थी।परिणामों से पहले, विश्लेषकों ने मुस्लिम वोटों के और अधिक एकजुट होने की भविष्यवाणी भी की थी, जिससे टीएमसी को फ़ायदा हो सकता था. 80 में से 31 मुस्लिम उम्मीदवारों की लिस्ट देखी जाए तो संदेह होता है लेकिन बीजेपी के चाणक्य ने होने नहीं दिया। कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी -एजेयूपी सहित सीपीआई एम के विजयी उम्मीदवारों पर नज़र डालिये तो कारण पता चल जायेगा।पश्चिम बंगाल में 27 फ़ीसद मुस्लिम मतदाता हैं, जिनमें से अधिकांश 2011 से ममता बनर्जी की पार्टी का समर्थन करते आ रहे थें। जिन्होंने इसबार अन्य के प्रति भी आस्था दिखाई दी और इस बार मुस्लिम वोटों में विभाजन हो गया। लेकिन दूसरी तरफ हिंदू संगठित हुए और निर्भिकता से उन्होंने मतदान किया। एक पेय पदार्थ के विज्ञापन में कहते हैं न डर के आगे जीत है। वही हुआ बंग हिन्दुओं के साथ। मुस्लिम मतदाताओं में कुछ हद तक निराशा भी थी , जिसका कारण था ‘कम्पेटिटिव कम्युनल पॉलिटिक्स’ “नतीजतन, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे ज़िलों में बेहतर प्रदर्शन के कारण कांग्रेस के वोट शेयर में वृद्धि हुई है. ये तृणमूल के गढ़ रहे थे .””पश्चिम बंगाल में लगभग 90 से 100 सीटें ऐसी हैं जिनका फ़ैसला मुस्लिम वोटों से होता था जिनकी संख्या सिमट के आधी हो गयी .”अन्य मामलों पर नज़र डालें तो बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों की संख्या भी वहां खूब है। यह कुल आबादी का लगभग 15 से 20 प्रतिशत के आसपास माना जाता है।कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, आसनसोल और दुर्गापुर जैसे औद्योगिक शहरों में बिहारी समुदाय की संख्या काफी अधिक है।बिहारी प्रभारी था ,कुछ तो असर पड़ता। … खैर खेला हो गया अब खेल का आनंद लीजिये।











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