रायपुर, 25 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब डीजल से बिजली की ओर बढ़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में 240 इलेक्ट्रिक बसें उतारने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार ने सिर्फ बसें चलाने के बजाय रूट, डिपो, चार्जिंग और डिजिटल निगरानी का पूरा नेटवर्क तैयार करने पर जोर दिया है।
240 बसें, चार शहर
केंद्र से मंजूर योजना के तहत रायपुर में सबसे बड़ा ई-बस नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम होगा। इसके साथ बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा को भी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। मकसद साफ है—शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ प्रदूषण घटाना और यात्रियों को सुविधाजनक परिवहन देना।
रूट अब मांग देखकर तय होंगे
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के निदेशक भानु प्रताप सिंह भदौरिया ने तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि रूट सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि वास्तविक यात्री जरूरत के आधार पर तय किए जाएं।
स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बाजार और प्रमुख संस्थानों को ई-बस नेटवर्क से जोड़ने वाले रास्तों की पहचान होगी। यात्रियों की संख्या, दूरी और कनेक्टिविटी के आधार पर रूट की व्यवहारिकता जांची जाएगी।
डिपो-चार्जिंग की बड़ी तैयारी
ई-बस चलाना आसान है, लेकिन उनके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। इसी वजह से डिपो और चार्जिंग स्टेशन को लेकर भी तैयारी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में बसों की संख्या बढ़ सकती है, इसलिए डिपो की क्षमता भी उसी हिसाब से विकसित करने पर जोर दिया गया है।
भूमि, निर्माण और अन्य मंजूरियों में देरी न हो, इसके लिए एनएचएआई, रेलवे और संबंधित विभागों से समन्वय करने को कहा गया है।
बस कहां है, सब मोबाइल पर दिखेगा
ई-बस सेवा को सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। संचालन की निगरानी के लिए कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तैयार होगा। इसके जरिए बसों की लोकेशन, रूट, यात्री संख्या और संचालन से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में मॉनिटर की जा सकेगी।
नागरिकों को भी यह जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने की तैयारी है कि कौन-सी बस किस रूट पर चलेगी और उसके स्टॉपेज कहां होंगे।
महिलाओं के लिए भी अलग प्लान
बैठक में महिलाओं के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। महिलाओं की सुविधा और जरूरत को ध्यान में रखते हुए अलग रूट और संचालन व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया गया है।
सवाल ये हैं…
क्या 240 बसों के लिए पर्याप्त डिपो और चार्जिंग स्टेशन समय पर तैयार हो पाएंगे? किन रूटों पर पहले बसें चलेंगी? किराया कितना होगा? संचालन कौन करेगा? महिलाओं के लिए विशेष सेवा कब शुरू होगी? सबसे बड़ा सवाल यही है कि कागज पर तैयार यह पूरा सिस्टम जमीन पर कितनी तेजी से उतरता है।
अधिकारियों की पूरी टीम मैदान में
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, सूडा सीईओ सुमीत अग्रवाल, सीएसपीडीसीएल के प्रबंध संचालक भीम सिंह कंवर, रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, कोरबा नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे, बिलासपुर नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, एनएचएआई उप महाप्रबंधक नितिन कुमार गुप्ता और शहरी कार्य मंत्रालय, दिल्ली के एएसओ हिमांशु जैन मौजूद रहे।
सरकार का दावा है कि ई-बसें शुरू होने के बाद चारों शहरों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लेकिन असली परीक्षा रूट, चार्जिंग, संचालन और समयसीमा की होगी।













Leave a Reply