बाल विवाह रोकथाम और पोषण पखवाड़ा में नवाचार से घर-घर पहुँचा संदेश
जांजगीर/ यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किया गया ऐसा प्रयोग है जिसने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों में भी नई सोच बड़े बदलाव की राह खोल सकती है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पंचायत जुनाडीह में मुनादी की पारंपरिक व्यवस्था को स्थानीय कोटवार ने एक नए रूप में जीवंत किया गया है।
जहां पहले मुनादी ढोल या पैदल सूचना तक सीमित थी, वहीं अब एक कोटवार ने अपनी मोटरसाइकिल को ही सूचना प्रसार का माध्यम बनाकर एक अनोखी पहल की है। बाल विवाह निषेध और पोषण पखवाड़ा (9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026) के दौरान यह पहल गाँव में जागरूकता का प्रभावी माध्यम बन गई है।
कोटवार रोज़ाना अपनी मोटरसाइकिल से गाँव की गलियों और दूर बसे मोहल्लों तक पहुँचकर माइक के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वे बाल विवाह के दुष्परिणाम, किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण के महत्व जैसे विषयों पर स्पष्ट और प्रभावी संदेश दे रहे हैं।
नवाचार से बढ़ी पहुँच और प्रभाव
गाँव की संकरी गलियों और बस्तियों तक संदेश पहुँचाने के लिए यह तरीका बेहद कारगर साबित हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले मुनादी की आवाज़ हर घर तक नहीं पहुँच पाती थी, लेकिन अब हर व्यक्ति तक सीधे संदेश पहुँच रहा है, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
गाँव में दिख रही सकारात्मक बदलाव
इस पहल को ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सराहा है। धीरे-धीरे गाँव में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता और पोषण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती नजर आ रही है।







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