रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में 80वें स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय समारोह सिर्फ परेड और तिरंगे तक सीमित नहीं रहा। यहां छत्तीसगढ़ पुलिस और नगर सेना के उन अफसरों और जवानों को सम्मान मिला, जिन्होंने लंबी सेवा, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और जनसेवा में उल्लेखनीय काम किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पदक और राज्य स्तरीय पुरस्कार देकर पुलिसिंग के बदलते स्वरूप की तस्वीर सामने रखी।
36 साल की सेवा को राष्ट्रपति सम्मान
धमतरी रक्षित केंद्र के ASI रामावतार सिंह राजपूत को 36 साल से ज्यादा की सेवा और आधारभूत प्रशिक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक-2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पुलिस सेवा में लंबी प्रतिबद्धता और प्रशिक्षण की भूमिका को रेखांकित करता है।
10 पुलिस अफसरों को भारतीय पुलिस पदक
अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, सराहनीय सेवा और आधुनिक नवाचारों के लिए 10 अधिकारियों-कर्मचारियों को भारतीय पुलिस पदक-2026 दिया गया। इनमें बिलासपुर रेंज के IG रामगोपाल, रायगढ़ SSP शशिमोहन सिंह, ATS नवा रायपुर की SP राजश्री मिश्रा, रायपुर ग्रामीण SP श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, 7वीं वाहिनी भिलाई की सेनानी निवेदिता पॉल और 20वीं वाहिनी महासमुंद की सेनानी मनीषा ठाकुर रावटे शामिल हैं।
इसके अलावा रायपुर के DCP तारकेश्वर पटेल, विशेष आसूचना शाखा नवा रायपुर की ASP उनैजा खातून अंसारी, प्रथम वाहिनी भिलाई के सहायक सेनानी जयलाल मरकाम और 20वीं वाहिनी महासमुंद के प्लाटून कमांडर हजारी लाल साहू को भी पदक मिला।
बाढ़ से बचाया, गोताखोरी में भी योगदान
नगर सेना की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। आपदा के समय राहत और बचाव में भी इसकी अहम भूमिका है। राजनांदगांव नगर सेना के नायक उत्तम कुमार साहू को शिवनाथ नदी में बाढ़ बचाव कार्य के लिए गृह रक्षक तथा नागरिक सुरक्षा सराहनीय सेवा पदक मिला। रायपुर नगर सेना के लांस नायक जोगेश्वर कुमार धीवर को उत्कृष्ट गोताखोरी और प्रशिक्षण कार्यों के लिए यही सम्मान दिया गया।
कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर फोकस
स्वतंत्रता दिवस समारोह में पुलिसिंग के सामाजिक पक्ष को भी सम्मान मिला। कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति-जनजाति और महिला-बाल सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को वर्ष 2025 के राज्य स्तरीय और पुलिस महानिदेशक पुरस्कार दिए गए।
जांजगीर-चांपा के ASI रामेश्वर प्रसाद यादव को गुरु घासीदास पुरस्कार मिला। इसमें 50 हजार रुपए नकद और बिलासपुर रेंज को रनिंग शील्ड दी गई।
महिला-बाल सुरक्षा में अर्चना धुरंधर सम्मानित
रायपुर की निरीक्षक अर्चना धुरंधर को कमजोर वर्गों तथा महिला-बाल संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दोनों पुरस्कारों के तहत 50-50 हजार रुपए नकद और रायपुर रेंज को रनिंग शील्ड दी गई।
गरियाबंद की SDOP निशा सिन्हा को पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पुरस्कार मिला। उन्हें 50 हजार रुपए नकद और रायपुर रेंज को रनिंग शील्ड दी गई।
थाना संचालन से लेकर पुलिस नेतृत्व तक
अजाक थाना बिलासपुर के निरीक्षक उत्तम साहू को उत्कृष्ट थाना संचालन के लिए शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार दिया गया। इसमें 50 हजार रुपए नकद और बिलासपुर रेंज को रनिंग शील्ड शामिल है। DSP अजाक बिलासपुर डीआर टंडन को पुलिस महानिदेशक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 25 हजार रुपए नकद और प्रशंसा पत्र दिया गया।
इन पुरस्कारों से यह संकेत भी मिलता है कि पुलिस व्यवस्था में अब सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई ही सफलता का पैमाना नहीं है। कमजोर वर्गों को न्याय, महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा और बेहतर थाना संचालन भी पुलिसिंग के अहम हिस्से बन रहे हैं।
परेड में दिखी सुरक्षा की ताकत
समारोह में पुलिस के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, जिला पुलिस, जेल पुलिस, नगर सेना, NCC और विशेष शाखाओं की टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद के संपूर्ण प्रभार और दर्री कोरबा के नगर पुलिस अधीक्षक विमल कुमार पाठक के नेतृत्व में परेड हुई।
अनुशासन और तालमेल के साथ निकली टुकड़ियों ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था की सामूहिक ताकत दिखाई। पुलिस से लेकर नगर सेना और युवा कैडेट तक एक ही परेड में नजर आए।
सम्मान के पीछे विकास का संदेश
स्वतंत्रता दिवस पर मिले ये सम्मान केवल पदक बांटने की औपचारिकता नहीं हैं। इनके जरिए पुलिसिंग के कई नए आयाम सामने आए हैं—अपराध नियंत्रण, तकनीकी नवाचार, आपदा प्रबंधन, महिला-बाल सुरक्षा, कमजोर वर्गों को न्याय और बेहतर थाना संचालन।
छत्तीसगढ़ में विकास की नई तस्वीर केवल सड़क, उद्योग और तकनीक से नहीं बनेगी। सुरक्षित समाज भी उसकी बुनियादी शर्त है। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस के मंच से पुलिस और नगर सेना के कर्मियों का सम्मान करते हुए सरकार ने सुरक्षा, सेवा और सुशासन को विकसित छत्तीसगढ़ की कहानी का अहम हिस्सा बनाया है।
तिरंगे के नीचे सेवा का संकल्प
पुलिस परेड ग्राउंड में पदकों की चमक के साथ उन हजारों पुलिसकर्मियों और जवानों की जिम्मेदारी भी दिखाई दी, जो रोज कानून-व्यवस्था संभालते हैं। किसी ने 36 साल सेवा दी, किसी ने बाढ़ में लोगों की जान बचाई तो किसी ने कमजोर वर्गों और पीड़ितों को न्याय दिलाने में भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता दिवस का यह समारोह इसी संदेश के साथ खत्म हुआ कि बदलते छत्तीसगढ़ में विकास के साथ सुरक्षा, सेवा और जिम्मेदारी की भूमिका भी उतनी ही बड़ी है।













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