मुख्यमंत्री ने इसरो की मोबाइल प्रदर्शनी का किया अवलोकन, विद्यार्थियों की समझ और उत्साह की सराहना
जशपुर | अंतरिक्ष विज्ञान को आमजन और विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में जशपुर में “स्पेस ऑन व्हील्स” कार्यक्रम एक अनूठी पहल बनकर उभरा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की यह मोबाइल प्रदर्शनी बच्चों के लिए ज्ञान का चलता-फिरता विद्यालय साबित हो रही है।
रणजीता स्टेडियम में आयोजित इस प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रॉकेट, उपग्रह और विभिन्न अंतरिक्ष मिशनों के मॉडल देखे। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और वैज्ञानिक समझ की सराहना की।
शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं—अंशु पासवान, भूमिका डाहरे और सारिका साहनी—ने चंद्रयान, मंगलयान सहित विभिन्न अंतरिक्ष तकनीकों को सरल भाषा में समझाया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक आज विकास की आधारशिला हैं, और “स्पेस ऑन व्हील्स” जैसे प्रयास ग्रामीण छात्रों में जिज्ञासा, नवाचार और तार्किक सोच को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान 17 छात्रों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने जिले के विभिन्न स्कूलों में विज्ञान जागरूकता फैलाने में योगदान दिया। साथ ही विद्यार्थियों को “द मैजिक ऑफ नाइट स्काई” पुस्तिका भी वितरित की गई।
यह पहल “अन्वेषण” कार्यक्रम के अंतर्गत विज्ञान भारती के सहयोग से संचालित की जा रही है। 7 अप्रैल से शुरू हुआ यह 14 दिवसीय अभियान जिले के सभी विकासखंडों में चल रहा है, जिसमें प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मोबाइल बस विभिन्न विद्यालयों में पहुंच रही है। इससे 10 हजार से अधिक विद्यार्थी सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
“स्पेस ऑन व्हील्स” में पीएसएलवी, जीएसएलवी, चंद्रयान, मंगलयान, आरएलवी और विभिन्न उपग्रहों के मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं। ऑडियो-विजुअल माध्यम, इंटरएक्टिव पैनल और लाइव डेमो के जरिए जटिल तकनीकों को सरल तरीके से समझाया जा रहा है।
यह पहल न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
जशपुर में “स्पेस ऑन व्हील्स” का आगमन अब एक ऐसे अभियान के रूप में उभर रहा है, जो भविष्य में जिले को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकता है।








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