राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संघ शताब्दी वर्ष में शतकंठ गीत कार्यक्रम का किया आयोजन

100 वर्ष पूरे होने पर 100 स्वयंसेवकों ने गया गीत

रायपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रायपुर महानगर के अंतर्गत आयोजित शतकंठ गायन कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीराम मंदिर, वीआईपी रोड में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 100 स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से गीत की प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान कुल 100 स्वयंसेवकों ने कुल पांच चयनित गीतों की एक साथ, एक स्वर में लयबद्ध प्रस्तुति दी। इसमें उल्लेखनीय यह हुआ कि इन गीतों में वैदिक, राष्ट्रीय और स्थानीय भाषा क्रमशः संस्कृत, हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा में गीत गाया गया, जो हमारे सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है। राष्ट्रीय विचारों को सिंचित करनेवाले इन गीतों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, एकता और समरसता का संदेश प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। सभी गीतों की प्रस्तुति अत्यंत मनमोहक रही और श्रोताओं ने पूरे भाव के साथ उसका आनंद लिया।

कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस सामूहिक प्रस्तुति ने वातावरण को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया और स्वयंसेवकों सहित उपस्थित प्रबुद्ध जनों के मन में राष्ट्र के प्रति गर्व और समर्पण की भावना का संचार हुआ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव ने अपना पाथेय देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में एकता, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। विगत 100 वर्षों की यात्रा में संघ अपने स्वयंसेवकों में शाखा में ऐसे गीत के माध्यम में राष्ट्रीय चरित्र निर्माण पर काम करती आई है। उन्होंने स्वयंसेवकों से राष्ट्र प्रथम की भावना को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संघ के अधिकारी, स्वयंसेवक एवं मातृशक्ति सहित प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। आयोजन को संघ के शताब्दी वर्ष के एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयाम के रूप में देखा गया।