घर में बुजुर्गों को सुई में धागा डालते वक्त अक्सर परेशानी होती है, और नल खुला छूट जाने से हजारों लीटर पानी रोज यूं ही बह जाता है। इन छोटी-छोटी रोजमर्रा की मुश्किलों को बड़े समाधान में बदल दिया है छत्तीसगढ़ के सरकारी और ग्रामीण स्कूलों के बच्चों ने। इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत इन नन्हे वैज्ञानिकों ने ऐसे गैजेट्स तैयार किए हैं, जो अब दिल्ली के सबसे बड़े मंच ‘भारत मंडपम’ पर देशभर के दिग्गजों के सामने पेश होंगे।
अंग्रेजी की मजबूरी नहीं, सोच में दम होना चाहिए
एससीईआरटी (SCERT) रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने एक बेहद अहम बात कही। उन्होंने कहा कि अक्सर हमारे बच्चों में यह झिझक रहती है कि वे अंग्रेजी माध्यम से नहीं हैं, तो आगे कैसे बढ़ेंगे। लेकिन हकीकत यह है कि भाषा सिर्फ बात कहने का जरिया है। अगर आपके विचार में नयापन है, तो आप अपनी मातृभाषा या हिंदी में भी दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। छत्तीसगढ़ के हिंदी माध्यम के बच्चों ने जापान की धरती पर जाकर यह साबित भी कर दिखाया है।
जापान जाकर लौटे सीनियर्स ने थपथपाई जूनियर्स की पीठ
इस मौके पर पिछले साल साकुरा साइंस प्रोग्राम के तहत जापान का दौरा कर चुके 5 छात्रों ने दिल्ली जाने वाली 40 सदस्यीय टीम का हौसला बढ़ाया। बलौदाबाजार के गगनदास मानिकपुरी ने बताया कि उन्होंने कैसे सुई में धागा पिरोने का आसान टूल बनाया, वहीं धमतरी की समीक्षा साहू ने बताया कि नल से व्यर्थ बहते पानी को रोकने के लिए उन्होंने खास डिवाइस कैसे तैयार की। इनके साथ नागेश कुमार, सुनैना और जांजगीर-चांपा के सैयद काशफ अली ने भी साझा किया कि एक साधारण सा देसी आइडिया कैसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक का टिकट दिला सकता है।
10 लाख में से चमके ये 40 सितारे
राज्य नोडल अधिकारी हिमांशु भारतीय ने बताया कि पूरे देश से 10 लाख आइडियाज में से टॉप 1 लाख को 10-10 हजार रुपये देकर मॉडल बनवाया गया था। इसके बाद राज्य स्तर पर चयनित इन 40 बच्चों को एनआईटी (NIT) रायपुर में वैज्ञानिकों से 2 दिन की खास मेंटरशिप दिलवाई गई और 25 हजार रुपये की अतिरिक्त मदद दी गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी सहित शिक्षा अधिकारियों ने बच्चों को सम्मानित किया और ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना किया। 12 से 14 अक्टूबर तक दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 12वीं राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में अगर ये छात्र शीर्ष 60 में आते हैं, तो इन्हें सीधे राष्ट्रपति भवन में अपने मॉडल दिखाने और जापान जाने का सुनहरा मौका मिलेगा।










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