रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। बैठक में छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। मुलाकात में खास जोर उन इलाकों पर रहा, जहां आज भी इलाज तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती है।
बस्तर-सुरगुजा सबसे बड़ा मुद्दा
साय ने बस्तर और सुरगुजा के दूरदराज, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सरकार इन क्षेत्रों में बेहतर मेडिकल सुविधा पहुंचाने पर काम कर रही है।
गांव से अस्पताल तक सिस्टम मजबूत
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रखना चाहती। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर आधुनिक चिकित्सा संस्थानों तक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कोशिश है कि सामान्य इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
केंद्र की योजनाओं पर भी मंथन
बैठक में केंद्र के सहयोग से प्रदेश में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति की समीक्षा हुई। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, गंभीर बीमारियों के इलाज, स्वास्थ्य बीमा और इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।
आयुष्मान का लाभ जमीन पर पहुंचे
साय ने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज की सुविधा बढ़ाई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों और आंकड़ों में नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से जरूरतमंदों तक पहुंचे।
दूरस्थ इलाकों में आधुनिक इलाज
मुख्यमंत्री ने आदिवासी और वन क्षेत्रों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी विकास की राह में बड़ी बाधा नहीं बननी चाहिए। बस्तर और सुरगुजा जैसे क्षेत्रों में आधुनिक उपचार, मेडिकल सेवाओं और स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार प्राथमिकता में है।
नड्डा ने दिया सहयोग का भरोसा
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने राज्य में मेडिकल सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र की ओर से आवश्यक सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया।
केंद्र-राज्य तालमेल पर जोर
साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार और बढ़ाई जा सकती है। सरकार का फोकस अब उन क्षेत्रों पर ज्यादा है, जहां भौगोलिक चुनौतियों के कारण अस्पताल, डॉक्टर और आधुनिक इलाज पहुंचाना मुश्किल रहा है।










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