रिजल्ट से पहले ठगों की एंट्री, फेस छात्रों को करवाएंगे पास! माशिंम ने जारी किया अलर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने विद्यार्थियों और पालकों को एक बार फिर सतर्क किया है। द्वितीय मुख्य और अवसर परीक्षा खत्म हो चुकी है। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन चल रहा है। इसी बीच ठगों की एंट्री शुरू हो गई है। मंडल ने चेताया है कि रिजल्ट सुधारने, नंबर बढ़ाने या फेल छात्र को पास कराने के नाम पर आने वाली किसी भी कॉल पर भरोसा न करें।

दो साल से चल रहा खेल

मंडल के मुताबिक 2024 और 2025 में भी रिजल्ट जारी होने के पहले और बाद में ऐसी शिकायतें सामने आई थीं। फर्जी कॉलर खुद को मंडल या शिक्षा विभाग से जुड़ा बताकर विद्यार्थियों और अभिभावकों को फोन करते थे। फिर नंबर बढ़ाने या परिणाम बदलने के नाम पर पैसों की मांग की जाती थी। यानी डर और उम्मीद दोनों बेचकर ठगी का धंधा।

‘नंबर बढ़वा देंगे’ वाली जालसाजी

ठगों का तरीका बेहद सीधा है। पहले छात्र का रोल नंबर, स्कूल या परीक्षा की जानकारी जुटाई जाती है। फिर कहा जाता है कि उसके कम नंबर आए हैं और कुछ पैसे देकर परिणाम सुधारा जा सकता है। कई बार फेल छात्र के अभिभावकों को पास कराने का भरोसा दिया जाता है। मंडल साफ कर चुका है कि ऐसी किसी भी व्यवस्था का उसके कामकाज से कोई संबंध नहीं है।

पोराबाई कांड की याद

बोर्ड परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल आज पहली बार नहीं उठा। 2008 के चर्चित पोराबाई टॉपर मामले में उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ और सामूहिक नकल के जरिए टॉप कराने की साजिश सामने आई थी। जनवरी 2026 में इस मामले में अदालत ने चार दोषियों को पांच-पांच साल की कठोर सजा सुनाई।

फर्जी नियुक्ति भी सामने आई

शिक्षा विभाग से जुड़े फर्जीवाड़े का दायरा सिर्फ परीक्षा तक नहीं रहा। 2025 में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में फर्जी जॉइनिंग लेटर के जरिए नौ लोगों के सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया था। आरोप था कि ये लोग लंबे समय तक नियमित कर्मचारी की तरह वेतन भी लेते रहे। ऐसे मामले बताते हैं कि सरकारी सिस्टम के नाम का इस्तेमाल कर ठगी करने वाले गिरोह कोई नई चीज नहीं हैं।

भर्ती घोटाले ने भी हिलाई साख

सरकारी भर्ती व्यवस्था भी आरोपों से अछूती नहीं रही। ब्ळच्ैब् की 2020-21 भर्ती में अनियमितताओं की जांच के दौरान 2025 में ब्ठप् ने आयोग के तत्कालीन सचिव और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में परिणामों में हेरफेर और पक्षपात के आरोप सामने आए।

ईमानदार छवि बचाने का दबाव

यही वजह है कि सरकार और उसके विभागों के सामने सिर्फ परीक्षा की निष्पक्षता बचाने की चुनौती नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार लगातार पारदर्शिता और ईमानदार प्रशासन की छवि बनाने का दावा करती है। ऐसे में कुछ लालची कर्मचारियों, बिचौलियों या बाहरी ठगों की करतूत भी पूरी व्यवस्था की साख पर असर डाल सकती है। एक फर्जी कॉल का मामला भी सवाल खड़ा कर सकता है कि अंदर की जानकारी बाहर कैसे पहुंची।

मंडल ने जिम्मेदारी साफ की

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्पष्ट किया है कि रिजल्ट बदलने, नंबर बढ़ाने या फेल छात्र को पास कराने के नाम पर किसी तरह की रकम नहीं ली जाती। किसी के फोन, मैसेज या अन्य माध्यम से ऐसा दावा करने पर पैसा देना सीधे ठगी का शिकार बनना होगा। मंडल ने ऐसे मामलों की तत्काल नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत करने की अपील की है।

पालक गलती न करें

सबसे बड़ा खतरा उन परिवारों के लिए है जो बच्चे के भविष्य को लेकर घबराए रहते हैं। इसी कमजोरी को ठग निशाना बनाते हैं। इसलिए किसी कॉलर को सिर्फ इसलिए भरोसेमंद न मानें कि उसके पास बच्चे की परीक्षा से जुड़ी जानकारी है। आधिकारिक जानकारी सिर्फ मंडल के अधिकृत माध्यमों से ही जांचें।

सरकार को भी सख्ती दिखानी होगी

चेतावनी जारी करना जरूरी है, लेकिन असली सवाल कार्रवाई का है। हर साल ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो सिर्फ एडवाइजरी से काम नहीं चलेगा। फर्जी कॉल के पीछे कौन है, उसे छात्रों की जानकारी कहां से मिल रही है और पैसा किस खाते में जा रहा हैकृइसकी जांच भी उतनी ही जरूरी है। क्योंकि एक ठग की कमाई, पूरी व्यवस्था की बदनामी बन सकती है।

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