नई दिल्ली / शीतकालीन सत्र के आरंभ पर राज्यसभा में आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने सभापति थिरु सी.पी. राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए कहा कि यह सदन के सभी सदस्यों के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभापति के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा और निर्णय लेने का अवसर सभी सदस्यों के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने सदन की ओर से सभापति को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं और आश्वस्त किया कि सदन के सदस्य उच्च सदन की गरिमा एवं सभापति की प्रतिष्ठा को सदैव बनाए रखेंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सभापति एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और जीवनभर समाज सेवा के प्रति समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा उनकी मूल पहचान रही है और राजनीति उसके एक पहलू के रूप में रही। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद उनका इस पद तक पहुँचना भारतीय लोकतंत्र की बड़ी ताकत है।
उन्होंने सभापति राधाकृष्णन के लंबे सार्वजनिक जीवन की प्रशंसा करते हुए कहा कि Coir Board के चेयरमैन के रूप में उनके कार्यकाल में संस्था ने ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक लाभ कमाया। साथ ही झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना और पुडुचेरी में राज्यपाल एवं उपराज्यपाल के रूप में उनके सेवाभाव को भी प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राधाकृष्णन प्रोटोकॉल से ऊपर रहकर समाज के बीच काम करने वाले नेता रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने दो घटनाओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने सभापति के जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा— बचपन में अविनाशी मंदिर के तालाब में डूबने की स्थिति और कोयंबटूर में एक भीषण बम विस्फोट से बाल-बाल बचना। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने राधाकृष्णन को समाज सेवा के प्रति और अधिक समर्पित किया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि काशी की पहली यात्रा के बाद सभापति ने जीवन में नॉनवेज त्यागने का निर्णय लिया, जिसे उन्होंने आध्यात्मिक प्रेरणा से उपजा संकल्प बताया।
प्रधानमंत्री ने उनके छात्र जीवन से शुरू हुए नेतृत्व, लोकतंत्र रक्षा के संघर्ष और आपातकाल के दौरान निभाई गई भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संगठन क्षमता, लोगों को जोड़ने की योग्यता और नई पीढ़ी को अवसर देने की प्रवृत्ति सभापति के कार्य की विशेषताएँ रहीं हैं।
कोयंबटूर से सांसद रहे राधाकृष्णन द्वारा सदन में क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका अनुभव राज्यसभा के सभापति और राष्ट्र के उपराष्ट्रपति के रूप में अत्यंत प्रेरक और मार्गदर्शक रहेगा।
अंत में प्रधानमंत्री ने सदन की ओर से सभापति को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह गौरवपूर्ण क्षण सभी सदस्यों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संकल्प देगा।












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