बाल विवाह मुक्त जांजगीर : 135 ग्राम पंचायतें और 2 नगर पंचायतें घोषित

दो वर्षों से एक भी मामला नहीं, जिला प्रशासन–यूनिसेफ–अलायंस फॉर बिहेवियर चेंज मेम्बर एग्रीकोन का निरंतर प्रयास सफल

रायपुर / जांजगीर-चांपा जिले ने बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। जिले की 135 ग्राम पंचायतों और 2 नगर पंचायतों को आधिकारिक रूप से ‘बाल विवाह मुक्त’ घोषित किया गया है, क्योंकि पिछले दो वर्षों में एक भी बाल विवाह का मामला दर्ज नहीं हुआ। यह उपलब्धि प्रशासनिक सतर्कता, समुदाय की भागीदारी और निरंतर जनजागरूकता का प्रमाण है।

जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, यूनिसेफ तथा अलायंस फॉर बिहेवियर चेंज मेम्बर एग्रीकोन द्वारा विगत वर्षों में जिले की सभी पंचायतों को बाल विवाह से मुक्त करने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों, युवा समूहों और महिला समूहों को जोड़ते हुए गांव–गांव में संवाद, रैलियाँ, चौपाल, स्कूल कार्यक्रम और घर–घर संपर्क अभियान संचालित किए गए।

अभियान के दौरान बाल विवाह के दुष्प्रभाव—शिक्षा से वंचित होना, स्वास्थ्य जोखिम, लड़कियों की सुरक्षा—के बारे में समुदाय को जागरूक किया गया। साथ ही, बाल विवाह प्रतिबंध कानून की जानकारी, शिकायत तंत्र और रोकथाम के उपायों को आम लोगों तक पहुँचाया गया।

सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) की रणनीति बनी आधार

अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू था सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) की रणनीति, जिसने समुदाय के दृष्टिकोण और व्यवहार में ठोस परिवर्तन लाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस रणनीति के तहत समुदाय की भागीदारी, स्थानीय नेतृत्व को सशक्त बनाना, पारिवारिक संवाद बढ़ाना, वास्तविक कहानियों और सकारात्मक उदाहरणों का प्रसार, तथा कानून और जोखिमों पर आधारित सरल संदेशों को नियमित रूप से साझा करना शामिल था। युवाओं और माता-पिता के साथ निरंतर संवाद ने बाल विवाह को “सामाजिक प्रथा” नहीं बल्कि “बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन” मानने की नई समझ विकसित की। इससे लोगों की सोच बदली और समुदाय स्वयं बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी लेने लगा।

अधिकारियों के अनुसार, जिले में शून्य बाल विवाह सुनिश्चित करना केवल शुरुआत है। लक्ष्य है कि जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्थायी रूप से बाल विवाह मुक्त बनाए रखा जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित बचपन, शिक्षा और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें।

जांजगीर जिले की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के ‘बाल विवाह मुक्त राज्य’ बनने की दिशा में एक सशक्त कदम मानी जा रही है।

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