रायपुर, 14 जनवरी 2026 | मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मंत्रालय महानदी भवन में भारतीय वन सेवा (IFS) 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जहां समृद्ध जैव विविधता के साथ-साथ बड़ी आबादी की आजीविका और सामाजिक जीवन वनों पर निर्भर है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में भारतीय वन सेवा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से आग्रह किया कि वे पूरे मनोयोग, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करें तथा इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं।
मुख्यमंत्री को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने अवगत कराया कि भारतीय वन सेवा के 06 प्रशिक्षु अधिकारी, जिन्होंने अपना मूल प्रशिक्षण देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून से प्राप्त किया है, उन्हें 16 सप्ताह की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के लिए छत्तीसगढ़ भेजा गया है।
यह प्रशिक्षण 05 जनवरी से 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा, जिसके दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को राज्य के बस्तर, रायगढ़, धमतरी, राजनांदगांव, कटघोरा और जशपुर वन मंडलों में पदस्थ कर वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, जनजातीय क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियों और जमीनी प्रशासनिक अनुभव से रूबरू कराया जाएगा।
प्रशिक्षु अधिकारियों के दल में छत्तीसगढ़ के दुर्ग और दंतेवाड़ा जिले के दो अधिकारी भी शामिल हैं, जिससे राज्य को भविष्य में स्थानीय अनुभव से युक्त वन सेवा अधिकारी प्राप्त होंगे।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, मुख्य वन संरक्षक रायपुर श्री मणि वासगन एस सहित प्रशिक्षु अधिकारी अक्षय जैन, कुणाल मिश्रा, एम. जालिंदर यादव, पारख सारदा, प्रीति यादव एवं यशस्वी मौर्या उपस्थित थे।








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