रायपुर। विवादित बयान और सार्वजनिक अशांति से जुड़े मामलों में गिरफ्तार छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक और छत्तीसगढ़ जोहर पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल को शुक्रवार को एक बार फिर रायपुर जिला न्यायालय में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 16 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। वहीं अन्य दर्ज प्रकरणों के संबंध में आरोपी को 12 जनवरी को पुनः अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार अमित बघेल को अपराध क्रमांक 243/25, 338/25, 329/25 और 340/2035 के तहत धारा 299 में गिरफ्तार किया गया है। यह सभी मामले अलग-अलग समाज और समुदायों के धर्मगुरुओं एवं सामाजिक गुरुओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े हुए हैं। इनमें सिंधी समाज और अग्रवाल समाज से संबंधित प्रकरण भी शामिल हैं।
कोर्ट को बताया गया कि अमित बघेल ने 3 दिसंबर को स्वयं सरेंडर किया था, जिसके बाद से वे जेल में बंद हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य लंबित मामलों के संबंध में अमित बघेल को 12 जनवरी को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले को लेकर रायपुर सहित प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज बनी हुई है।
तीन शहरों में दर्ज एफआईआर, कोर्ट की अनुमति से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार अमित बघेल के खिलाफ भिलाई, छिंदवाड़ा और बेंगलुरु में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। इन तीनों स्थानों से एफआईआर की प्रतियां प्राप्त होने के बाद अदालत से अनुमति लेकर पुलिस ने इन मामलों में भी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की है। जांच एजेंसियां सभी मामलों को जोड़कर विस्तृत विवेचना कर रही हैं।
जमानत का विरोध, समाज ने रखे छह बिंदु
इससे पहले अग्रवाल समाज की ओर से अदालत में आवेदन देकर आरोपी की जमानत याचिका खारिज करने की मांग की गई थी। आपत्तिकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल ने न्यायालय में तर्क दिया कि आरोपी के विरुद्ध दर्ज अपराधों की गंभीरता और समाज में फैली अशांति को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपी के कथनों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है।
छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति तोड़फोड़ से शुरू हुआ विवाद
मामले की जड़ 26 अक्टूबर 2025 की घटना से जुड़ी है, जब रायपुर के वीआईपी चौक पर स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। घटना की सूचना मिलने के बाद अगले दिन अमित बघेल मौके पर पहुंचे और वहां जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति भी बनी।
हंगामे के बाद प्रशासन द्वारा मूर्ति को पुनः स्थापित किया गया। पुलिस ने अगले दिन सुबह राम मंदिर क्षेत्र से आरोपी को हिरासत में लिया था।
मानसिक स्थिति और नशे की बात भी जांच में
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि मूर्ति तोड़ने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसने नशे की हालत में यह कृत्य किया था। इसके बाद हुए प्रदर्शन के दौरान अमित बघेल द्वारा अग्रवाल समाज और सिंधी समाज को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों ने मामले को और गंभीर बना दिया।
देशभर में सामाजिक विरोध, कई जगह एफआईआर
आपत्तिजनक बयान सामने आने के बाद अग्रवाल समाज और सिंधी समाज में व्यापक रोष फैल गया। रायपुर, रायगढ़, सरगुजा सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों और अन्य राज्यों में समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए और अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई गईं।
वहीं रायपुर के कोतवाली थाना में सिंधी समाज के पदाधिकारियों ने भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
जांच जारी, कोर्ट की नजर अगली सुनवाई पर
फिलहाल अमित बघेल न्यायिक हिरासत में हैं और विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों को लेकर पुलिस समन्वय के साथ आगे की कार्रवाई कर रही है। अदालत में अगली सुनवाई के दौरान जमानत और अन्य कानूनी पहलुओं पर फैसला लिया जाएगा।
अमित बघेल का जीवन परिचय
बता दें कि अमित बघेल छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख हैं। साल 2023 में धरसीवा सीट से चुनाव लड़ा था। इनका विवादों से पुराना नाता रहा है। 26 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अमित बघेल को कड़ी फटकार लगाते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि, अपनी जुबान पर लगाम रखें। जहां-जहां FIR दर्ज है, वहां की कानूनी प्रक्रिया का सामना करें। कोर्ट ने साफ कहा था कि कोई राहत नहीं दी जाएगी और कानून अपना काम करेगा।
अमित बघेल की गिरफ्तारी पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का भी बयान आया था। तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि अलग-अलग धर्म संप्रदाय के लोगों पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले अमित बघेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।








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