डॉ हेडगेवार जी की जीवन से सीखें हिन्दू निष्ठ होना : महा. सह कार्यवाह आकाशदीप
रायपुर। सर्व हिन्दू समाज के तत्वावधान में आयोजित हिन्दू सम्मलेन में बसंती हवाओं के मधुर झोकों के साथ रायपुर महानगर में एक राग में एकता का बयार बहा। बसंत ऋतू के आगमन के साथ रायपुर महानगर में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियाँ अपने चरम उत्साह में दिखा।
पुरानी बस्ती के महामाई पारा बस्ती में हुए हिन्दू सम्मलेन में भारत भूषण वर्मा ने कहा कि उच्च वैश्विक दर्शन हिन्दुओं कि विशाल परम्परा का प्रतिबिम्ब है। हमें आपने हिदू दर्शन के अनुसार जीवन को व्यवस्थित करना होगा ताकि देश एकता के स्वर में गा सके।
दीनदयाल नगर के सुंदरनगर में हुए सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर सह कार्यवाह आकाशदीप गुप्ता ने संघ के प्रणेता रहे डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के हिन्दू निष्ठ जीवन शैली के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने बाल्यकाल में ब्रिटिश महारानी के जन्मदिन पर मिले मिठाई को इसलिए फेंक दिया था कि मुझे अपना देश प्यारा था जिस पर वे जुल्म नहीं सह सकते थे। डॉ साहब अपने जवानी में डॉक्टरी की पढाई के लिए कलकत्ता जाना इसलिए स्वीकार किया कि वहां आन्दोलन खड़ा करने का गुण सीखा जा सके, जो हमें कुशल रणनीतिकार होने का सीख देता है। यह सभी कार्य ही सहज रूप से हिंदू एकता के साथ करता आया है। इस जीवनशैली को बताकर हमें सोए हुए हिंदुओं को जगाना है।
कार्यक्रमों में श्रद्धेय संतजनों ने एक स्वर में प्रेरक उद्बोधन देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन में सर्व हिन्दू समाज द्वारा आयोजित हिन्दू सम्मेलन की महत्ता पर प्रकाश डाला। हिन्दू सम्मेलन में सभी मातृशक्ति वक्ता ने संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मातृ शक्ति की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज को समझने के लिए परिवार को समझना आवश्यक है, क्योंकि परिवार ही समाज की मूल इकाई है।
शहर के कुल 12 जगहों पर हुआ भव्य आयोजन
गुढ़ियारी नगर के शिवनगर में उमेश अग्रवाल, रायपुर इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी में उमाशंकर वर्मा, पंडरी में रामजी राजवाड़े, बंजारी नगर के भनपुरी में गोपाल यादव, संता कॉलोनी में नीलकंठ वर्मा, वीर सावरकर नगर कोटा में पूर्णेंदु सिन्हा, टाटीबंध में श्रीनाथ गुप्ता, रविग्राम में अभिषेक राय, कृषक नगर के जोरा बस्ती में महानगर सह प्रचार प्रमुख मनीष कश्यप तथा पिरदा में नकुल सिंह ने अपने विचार रखे।
सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा को सेवा, संस्कार और संगठन की प्रेरणादायी गाथा बताया। उन्होंने हिन्दू समाज की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्र की शक्ति बताया। परिवार को समाज की आधारशिला बताते हुए भारतीय संस्कारों के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया। पंच परिवर्तन के माध्यम से स्व आधारित जीवन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के पालन का आह्वान किया गया।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित सम्मेलनों में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं एवं मातृ शक्ति की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।
पंथी नृत्य की थाप और गुरु घासीदास जी को नमन के साथ हुआ हिन्दू सम्मलेन
कृषक नगर के जोरा बस्ती में आयोजित हिन्दू सम्मलेन में उस वक्त एकता के स्वर और समरस होने का व्यवहार मूर्त रूप लिया, जब गुरु घासीदास बाबा के मंदिर में पूजन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ । इस सम्मलेन में ऐतिहासिक और दार्शनिक स्वरूपी पंथी नृत्य की सांघिक थाप के साथ सामूहिक नृत्य का मनोरम प्रदर्शन किया गया। इसमें एक गीत के माध्यम से जाती-पांति के बंधन को तोड़ते हुए हम एक माटी के हैं, ऐसा संवाद स्थापित हुआ। तो वही अन्य गीत और नृत्य से कन्या भ्रूण हत्या पर रोक, संस्कारयुक्त शिक्षा, पोषण आदि के विशाल हिन्दू दर्शन को बताया गया।








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