अबूझमाड़ में बदलाव की नई इबारत: जहां 15 साल रहा सुरक्षा कैंप, अब वहीं संवर रहा आदिवासी बच्चों का भविष्य

नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में बदलाव की एक नई और उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। नारायणपुर जिले के भाटपाल में जिस परिसर में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप संचालित होता रहा, आज उसी परिसर में दूरस्थ आदिवासी गांवों के बच्चे रहकर अपने बेहतर भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।

बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल के तहत पुराने सुरक्षा कैंप को जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास और शिक्षा से जुड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। कभी सुरक्षा और शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह परिसर अब शिक्षा, अवसर और नई पीढ़ी के भविष्य निर्माण का आधार बन गया है।

यह केवल किसी पुराने भवन का नया उपयोग नहीं, बल्कि उस बदलते अबूझमाड़ की कहानी है, जहां विकास की प्राथमिकताएं सुरक्षा से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आजीविका और नई पीढ़ी के लिए अवसरों के विस्तार तक पहुंच रही हैं।

जहां सुरक्षा थी प्राथमिकता, अब शिक्षा बन रही नई पहचान

नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भाटपाल का यह परिसर लंबे समय तक सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण ठिकाना रहा। करीब 15 वर्षों तक यहां सुरक्षा बल तैनात रहे। क्षेत्र में परिस्थितियां बदलने के बाद परिसर खाली हुआ तो जिला प्रशासन ने इसे अनुपयोगी छोड़ने के बजाय बच्चों की शिक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया।

कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन की पहल पर इस परिसर को उन जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास के रूप में विकसित किया गया, जो दूरस्थ और दुर्गम गांवों से पढ़ने आते हैं। लंबी दूरी और आवास की सुविधा नहीं होने के कारण ऐसे विद्यार्थियों के लिए नियमित पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था।

11 अगस्त 2026 से यहां विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू की गई। इसके साथ ही जिस परिसर की पहचान कभी सुरक्षा कैंप के रूप में थी, उसकी भूमिका पूरी तरह बदल गई।

एक ही परिसर में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के बच्चों को सहारा

भाटपाल के पूर्व सुरक्षा कैंप परिसर में वर्तमान में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।

प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां 114 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले इन बच्चों को विद्यालय के समीप सुरक्षित आवास मिलने से उनकी नियमित शिक्षा की राह आसान हुई है।

इसी परिसर में पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास भी संचालित किया जा रहा है। इसमें कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50 सीटें स्वीकृत हैं और वर्तमान में 39 विद्यार्थी निवासरत हैं। यह व्यवस्था एजुकेशन सिटी कुतुल से संबद्ध विद्यार्थियों की आवासीय आवश्यकता को भी पूरा कर रही है।

विशेष रूप से पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की शुरुआत उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जिन्हें दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय के आसपास निजी आवास तलाशना पड़ता था। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। अब छात्रावास मिलने से उन्हें सुरक्षित आवास के साथ पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण भी मिल रहा है।

स्कूल सिर्फ 50 मीटर दूर, दूरी की बड़ी बाधा हुई कम

दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की राह में केवल स्कूल में प्रवेश लेना ही चुनौती नहीं होती। लंबी दूरी, परिवहन और रहने की व्यवस्था भी उनकी नियमित पढ़ाई को प्रभावित करती है।

भाटपाल की नई व्यवस्था ने इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर है। इससे विद्यार्थियों को रोज लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे अपना अधिक समय पढ़ाई में लगा पा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *