जशपुर, छत्तीसगढ़ | जिला प्रशासन, यूनिसेफ, अलायन्स फॉर बिहेवियर चेंज, सर्वहितम और एग्रिकोन के अंतर्गत जिला सभागार में साइबर सुरक्षा जागरूकता एवं “आज क्या सीखा” (Parent Engagement) कार्यक्रम का प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 80 समर्पित स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जो बाल संरक्षण, डिजिटल सुरक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
स्वयंसेवकों के जज़्बे को मिला सम्मान
कार्यक्रम की शुरुआत एग्रिकोन डीसी शालिनी गुप्ता द्वारा स्वयंसेवकों को ऊर्जा और प्रेरणा देने के साथ हुई। उन्होंने प्रतिभागियों को सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य करने और स्थानीय प्रयासों को वैश्विक दृष्टि से जोड़ने का संदेश दिया।

सीईओ अभिषेक कुमार ने कहा, “स्वयंसेवक के दिल से अधिक शक्तिशाली कुछ भी नहीं होता।” उन्होंने जयहों अभियान, बाल विवाह रोकथाम एवं ड्रॉपआउट जागरूकता जैसे प्रयासों की सराहना करते हुए स्वयंसेवकों से समग्र विकास पर ध्यान देने और समुदाय में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया।
साइबर सुरक्षा पर सशक्त मार्गदर्शन
डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह ने साइबर सुरक्षा पर विस्तृत सत्र लेते हुए फर्जी वेबसाइट, संदिग्ध APK फाइल, फर्जी RTO ई-चालान, अज्ञात वीडियो कॉल और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों से सावधान रहने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार सोशल मीडिया प्रतिस्पर्धा और भावनात्मक जाल में फंसाकर युवाओं को ठगी का शिकार बनाया जाता है। महिलाओं को लक्षित कर होने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी और एआई आधारित मॉर्फ्ड तस्वीरों के दुरुपयोग पर भी उन्होंने जागरूक किया।
यूनिसेफ की पहल: Click Safe, Cyber Yodha और “आज क्या सीखा”
यूनिसेफ की बाल संरक्षण अधिकारी चेतना देसाई ने Click Safe और Cyber Yodha पहलों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को आभासी दुनिया में खोने के बजाय वास्तविक जीवन में संतुलन और सुरक्षा सिखाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को घर में प्रेम और सराहना नहीं मिलती, तो वे ऑनलाइन मान्यता की तलाश में भावनात्मक शोषण के शिकार हो सकते हैं। “आज क्या सीखा” खंड के माध्यम से स्वयंसेवकों को प्रत्येक समुदाय में समस्या-समाधान की स्थानीय क्षमता विकसित करने पर बल दिया गया।
रूप नहीं, गुण ही सच्ची सुंदरता
इंटरैक्टिव कार्यशाला के दौरान यूनिसेफ के एसबीसी कंसलटेंट चंदन कुमार ने “People, Platform और Product” फ्रेमवर्क के माध्यम से स्वयंसेवकों को रणनीतिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने “रूप नहीं, गुण” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा,
“हमारे गुणों का विकास ही हमारी वास्तविक सुंदरता है। बाहरी रूप क्षणिक है, लेकिन व्यवहार, संवेदनशीलता और मूल्य ही व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाते हैं।”
उन्होंने जेंडर से जुड़े सामाजिक मिथकों को एक सरल उदाहरण से समझाया और बताया कि समाज में प्रचलित कई धारणाएँ व्यवहार आधारित पूर्वाग्रह हैं, जिन्हें संवाद और सकारात्मक उदाहरणों के माध्यम से बदला जा सकता है।
“आदि कर्मयोगी अभियान” : सामुदायिक नेतृत्व की दिशा में पहल
एक अन्य सत्र में “आदि कर्मयोगी अभियान” की विस्तृत जानकारी साझा की गई। इस संदर्भ में यूनिसेफ एवं एग्रिकोन डीसी शालिनी गुप्ता ने संयुक्त रूप से बताया कि यह अभियान समुदाय के भीतर नेतृत्व क्षमता को विकसित करने और जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन को गति देने की पहल है।
शालिनी गुप्ता ने कहा कि “जब समुदाय स्वयं समाधान का हिस्सा बनता है, तभी परिवर्तन स्थायी होता है। आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य प्रत्येक गांव में ऐसे नेतृत्व का निर्माण करना है, जो स्वास्थ्य, पोषण, जेंडर समानता और बाल संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा सके।”
यूनिसेफ प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन की एक दीर्घकालिक रणनीति है, जिसमें स्थानीय स्वयंसेवक परिवर्तन के वाहक बनते हैं।
नवाचार और सामूहिक प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने “पढ़ाई का कोना” जैसी पहल, साइबर सुरक्षा को रोचक ढंग से प्रचारित करने, होम विजिट्स और सरल भाषा में संवाद जैसे नवाचारी सुझाव प्रस्तुत किए।
यह कार्यक्रम जशपुर में डिजिटल सुरक्षा, अभिभावक सहभागिता और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। स्वयंसेवकों, जिला प्रशासन और यूनिसेफ साझेदारों की यह साझा प्रतिबद्धता एक जागरूक, सुरक्षित और सशक्त जशपुर के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
इस कार्यक्रम में डॉ. लाल उमेद सिंह (डीआईजी, एसएसबी), अभिषेक कुमार (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जशपुर), चेतना देसाई (बाल संरक्षण अधिकारी, यूनिसेफ), चंदन कुमार (एसबीसी कंसलटेंट, यूनिसेफ), एग्रिकोन के स्टेट कोऑर्डिनेटर योगेश पुरोहित, ABC की SBC कंसलटेंट सृष्टि चौब सहित सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक और अधिकारी मौजूद थे।








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