नई दिल्ली | रक्षा मंत्रालय (MoD) ने टेक्नोलॉजी पर्सपेक्टिव एंड कैपेबिलिटी रोडमैप (TPCR)-2025 जारी किया है, जो अगले 15 वर्षों के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की तकनीकी और सामरिक आवश्यकताओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत करता है। इस दस्तावेज़ में हाइपरसोनिक मिसाइलें, परमाणु प्रणोदन प्रणाली, निर्देशित-ऊर्जा हथियार और मानव रहित एवं स्वायत्त प्लेटफॉर्म जैसे अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों को शामिल करने की योजना रेखांकित की गई है।
रक्षा क्षेत्र के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज
टीपीसीआर-2025 भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की दीर्घकालिक क्षमता आवश्यकताओं की अग्रिम जानकारी उद्योग, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों को उपलब्ध कराता है, ताकि वे अपने अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सशस्त्र बलों की जरूरतों के अनुरूप ढाल सकें।
इससे पहले टीपीसीआर के संस्करण वर्ष 2013 और 2018 में जारी किए गए थे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, टीपीसीआर-2018 पर उद्योग जगत से प्राप्त सुझावों के आधार पर कई स्वीकृतियाँ (AoN) और अनुबंध सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
टीपीसीआर-2025 का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और सशस्त्र बलों को साइबर, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बहु-आयामी युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
नौसेना: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगी सामरिक पहुंच
रोडमैप के तहत भारतीय नौसेना के लिए परमाणु प्रणोदन प्रणाली और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) से लैस अगली पीढ़ी के विमानवाहक पोत के विकास की योजना है।
इसके अतिरिक्त विध्वंसक पोत, कार्वेट, लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD), स्वायत्त पनडुब्बी वाहन (AUV) और तेज इंटरसेप्टर नौकाओं की तैनाती का प्रस्ताव है। इन कदमों से समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी क्षमता और तटीय रक्षा को मजबूती मिलेगी तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति सुदृढ़ होगी।
थलसेना: सीमाओं के लिए आधुनिक साजो-सामान
भारतीय थलसेना अपनी पुरानी बख्तरबंद गाड़ियों के स्थान पर लगभग 1,800 फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स (FRCVs) शामिल करेगी। साथ ही, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संचालन के लिए हल्के टैंकों की खरीद की योजना है, जिससे उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर क्षमता बढ़ेगी।
इसके अलावा एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM), मानव रहित हवाई वाहन (UAV) के साथ लोइटरिंग म्यूनिशन का एकीकरण और आईईडी निरोधक (counter-IED) रोबोटिक सिस्टम की तैनाती का प्रस्ताव है। यह नेटवर्क-केंद्रित और हाइब्रिड युद्ध की तैयारी को दर्शाता है।
वायुसेना: निर्देशित-ऊर्जा और गहरी मारक क्षमता
भारतीय वायुसेना के लिए लेजर आधारित निर्देशित-ऊर्जा हथियार और स्टील्थ बॉम्बर ड्रोन की तैनाती की योजना है, जिससे निवारक क्षमता और गहरी मारक शक्ति मजबूत होगी।
हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो-सैटेलाइट (HAPS) और समताप मंडलीय एयरशिप के उपयोग से निरंतर खुफिया, निगरानी एवं टोही (ISR) तथा सुरक्षित संचार सुनिश्चित किया जाएगा, विशेषकर दो मोर्चों की संभावित स्थिति में।
तीनों सेनाओं के लिए संयुक्त पहल: हाइपरसोनिक और एआई
टीपीसीआर-2025 के प्रमुख बिंदुओं में स्क्रैमजेट प्रणोदन प्रणाली से लैस 500 से अधिक हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास और तैनाती का लक्ष्य शामिल है। साथ ही, यूनिवर्सल मिसाइल लॉन्चर प्रणाली से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाई जाएगी।
इसके अतिरिक्त एआई-सक्षम साइबर टूल, क्वांटम संचार नेटवर्क और उपग्रह सुरक्षा उपायों को अपनाकर साइबर और अंतरिक्ष आधारित खतरों से रक्षा को मजबूत किया जाएगा।
अत्याधुनिक तकनीक और हरित लॉजिस्टिक्स
दस्तावेज़ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), डिजिटल ट्विन सिमुलेशन और स्वायत्त प्रणालियों के उपयोग पर बल दिया गया है, जिससे डेटा-आधारित और पूर्वानुमानित युद्ध क्षमता विकसित की जा सके।
साथ ही, हरित लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों को भी रक्षा रणनीति का हिस्सा बनाया गया है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ सतत विकास का संतुलन स्थापित किया जा सके।
आत्मनिर्भरता और सामरिक सुदृढ़ता की दिशा में बड़ा कदम
टीपीसीआर-2025 के माध्यम से रक्षा मंत्रालय ने उद्योग को स्पष्ट तकनीकी दृष्टि प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। यह रोडमैप अगले डेढ़ दशक में भारतीय सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक, बहु-आयामी और तकनीक-सक्षम सैन्य शक्ति में रूपांतरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।









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