मार्च 2026 तक इसरो के सात बड़े मिशन; गगनयान का पहला मानवरहित उड़ान मुख्य आकर्षण

नई दिल्ली।
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आने वाले वर्षों में नई ऊँचाइयों को छूने जा रहा है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मार्च 2026 तक सात प्रमुख मिशनों को लॉन्च करने की तैयारी में है। इनमें बहुप्रतीक्षित गगनयान कार्यक्रम की पहली मानवरहित उड़ान भी शामिल है, जो भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा योजना के लिए निर्णायक कदम माना जा रहा है।

मुख्य मिशन

इसरो और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा प्रस्तावित मिशनों में शामिल हैं:

  • LVM3 M6 / NSIL: एएसटी स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह का वाणिज्यिक प्रक्षेपण।
  • PSLV C62 / EOS-N1: पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और 18 सह-यात्री उपग्रहों का प्रक्षेपण।
  • HLVM3 G1 / OM-1: गगनयान की पहली मानवरहित उड़ान, जो मानव-सक्षम रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और पुनः प्रवेश प्रणाली का परीक्षण करेगी।
  • GSLV F17 / EOS-05: रणनीतिक उपयोग वाला पृथ्वी अवलोकन मिशन।
  • PSLV C63 / TDS-01: उच्च-थ्रस्ट इलेक्ट्रिक प्रणोदन, स्वदेशी TWTA और क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक का परीक्षण।
  • PSLV N1 / EOS-10: पहला उद्योग-निर्मित PSLV, जिसके साथ महासागर विज्ञान उपग्रह प्रक्षेपित होगा।
  • SSLV L1 / NSIL: वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए समर्पित लॉन्च।

NSIL की बड़ी भूमिका

अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद NSIL ने वाणिज्यिक प्रक्षेपणों में बड़ी भूमिका निभाई है। अब तक 137 विदेशी उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया जा चुका है। जल्द ही उद्योग-निर्मित PSLV-XL भी लॉन्च किया जाएगा।

टेक्नोलॉजी और प्रभाव

इन मिशनों से भारत इलेक्ट्रिक प्रणोदन, उन्नत उपग्रह तकनीक, क्वांटम संचार और मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं में बड़ा कदम बढ़ाएगा। EOS-10 और अन्य पृथ्वी अवलोकन मिशन मौसम पूर्वानुमान, समुद्री अनुसंधान, मत्स्य पालन और आपदा प्रबंधन को नई क्षमता प्रदान करेंगे।

भारत के बढ़ते अंतरिक्ष अभियानों से वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा और वैज्ञानिक नेतृत्व और मजबूत होगा।

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