बिलासपुर में दिव्यांगता संबंधी कलंक से निपटने हेतु यूनिसेफ की मानव-केंद्रित डिज़ाइन कार्यशाला

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ – 19 फरवरी 2026UNICEF India ने आज यहाँ दिव्यांगता समावेशन पर एक गतिशील मानव-केंद्रित डिज़ाइन (HCD) कार्यशाला की शुरुआत की। इस कार्यशाला में देखभालकर्ता, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, सरकारी अधिकारी, राज्य स्तरीय सिविल सोसाइटी संगठन (CSOs), तकनीकी विशेषज्ञ तथा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के फील्ड कार्यालयों से जुड़े यूनिसेफ कर्मी, साथ ही शैक्षणिक एवं व्यवहार विज्ञान से जुड़े साझेदार शामिल हुए।

प्रतिभागी सक्रिय रूप से मरीजों की यात्रा (पेशेंट जर्नी) का मानचित्रण कर रहे हैं, सामाजिक कलंक की परतें खोल रहे हैं और अस्पताल हेल्पलाइन, सहकर्मी सहयोग नेटवर्क, क्लस्टर-स्तरीय केंद्रों में आयु-उपयुक्त थेरेपी खेलों की व्यवस्था, दिव्यांग सहायता कियोस्क और एआई चैटबॉट जैसे नवाचार समाधान सह-निर्मित कर रहे हैं।


फील्ड विज़िट से जमीनी अनुभवों की समझ मजबूत

टीम ने जांजगीर जिले के अकलतरा ब्लॉक का फील्ड दौरा भी किया, ताकि जमीनी अनुभवों को बेहतर ढंग से समझा जा सके। इस दौरान दिव्यांगता समावेशन से जुड़े कलंक और भेदभाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व समूहों (पर्सोना) की पहचान की गई। इनमें दिव्यांग बच्चों के अभिभावक, स्वयं दिव्यांग बच्चे, उनके सहपाठी, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा), स्कूल शिक्षक एवं विशेष शिक्षक शामिल हैं।

इन पहचाने गए समूहों के आधार पर प्रतिभागियों के लिए एक चर्चा मार्गदर्शिका तैयार की गई, ताकि फील्ड विज़िट के दौरान हितधारकों के साथ सार्थक संवाद सुनिश्चित किया जा सके।


सहभागिता और नवाचार पर केंद्रित कार्यशाला

प्रतिभागियों ने “How Might We” (हम कैसे कर सकते हैं) चुनौतियों पर मंथन किया, जिसमें सहपाठियों, शिक्षकों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (FLWs), चिकित्सकों और पंचायत नेताओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों के लिए सहयोगी तंत्र विकसित हो सके।

प्रारंभिक जर्नी मैपिंग से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, शिक्षा और सामुदायिक एकीकरण में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान हुई है, जो कलंक-मुक्त वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अल्का मल्होत्रा, यूनिसेफ दिल्ली की एसबीसी (Social and Behaviour Change) विशेषज्ञ, ने कार्यशाला की सहयोगात्मक भावना को रेखांकित करते हुए कहा,
“प्रतिभागियों ने यह साझा किया कि हम उन बच्चों की स्थिति कैसे बेहतर बना सकते हैं, जो दिव्यांगता से जुड़े कलंक के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक सहयोग में प्रणालीगत बाधाओं का सामना करते हैं। व्यवहारिक अंतर्दृष्टि और मानव-केंद्रित डिज़ाइन के माध्यम से हम इन चुनौतियों को व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में बदल रहे हैं।”

यह HCD दृष्टिकोण समावेशन के लिए हमारी डिजाइन प्रक्रिया में मूलभूत परिवर्तन लाता है और वास्तविक जीवन के अनुभवों को क्रियाशील बदलाव में परिवर्तित करता है। 18 से 20 फरवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम दिव्यांगता से जुड़े कलंक को कम करने हेतु व्यवहारिक दृष्टिकोणों पर आधारित एजेंडा का अनुसरण कर रहा है और स्थानीय संदर्भों पर आधारित समाधानों के सह-निर्माण पर जोर देता है।


यूनिसेफ इंडिया के बारे में

UNICEF 190 से अधिक देशों में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। भारत में यूनिसेफ स्वास्थ्य, शिक्षा और समावेशन से जुड़े नवाचारी कार्यक्रमों का समर्थन करता है तथा सरकारों और समुदायों के साथ साझेदारी में सबसे वंचित बच्चों तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।

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