हमारा प्रत्यक्ष आचरण ही भेद – भाव समाप्त करेगा : लिमये

  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्मेलन का हुआ शुभारंभ
  • अतिथियों के द्वारा किया गया गौ पूजन
  • हिन्दू सम्मलेन में उमड़ी भीड़

रायपुर । हमारा प्रत्यक्ष आचरण ही भेद – भाव समाप्त करेगा, जिससे समाज सामाजिक समरस हो पाएगा। उक्त वक्तव्य रायपुर के अग्रसेन चौक के पास स्थित भैंसथान मैदान में हिंदु जागरण समिति, रामसागर पारा के अंतर्गत आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमेय ने दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि आज भारत विकसित भारत की दहलीज पर खड़ा है इसलिए यह विराट हिंदू सम्मेलन के माध्यम से एक परिवर्तनकारी जागरण का संकल्प करना है। पूर्व के काल में विभिन्न आक्रमण से वैभवशाली भारत की परिस्थितियां बदलती गई। जिससे सामाजिक व्यवस्था ध्वस्त होती रही। गुरु गोविंद सिंह जैसे अनेक महापुरुषों द्वारा हिंदू समाज का पुनः जागरण हो सका। छत्रपति शिवाजी महाराज के द्वारा हिंदवी स्वराज के संकल्प को पूर्ण किया गया। आज यही दृश्य पुनः निर्मित हो रहा है। आज कश्मीर घाटी में 90 मंदिरों की पुनर्स्थापना हुई, हमारी प्राचीन योग विधा 171 देश में प्रसारित हुआ। जिससे लाखों करोड़ों लोग निरोगी हो रहे हैं स्वस्थ हो रहे हैं। चंद्रयान के महत्व को सुदूर अंचलों तक पहुंचाकर एस्पिरेंट इंडिया की ओर द्रुत गति का परिवर्तन प्रबल बनता जा रहा है। इससे गर्व नहीं करना है, लेकिन सामर्थ्य बढ़ाकर ही वैश्विक लक्ष्य की प्राप्ति संभव है।
भारत को आगे बढ़ाने के दौर में कुरीतियों और भिन्न जाति भेदभाव को भुलाकर, सभी को समरसता पूर्ण व्यवहार करना होगा। प्रत्यक्ष आचरण ही यह भेद समाप्त कर सकता है, इस विषय पर कार्य करने की आवश्यकता है। समाज में भेदभाव समाप्त किए बिना वैभव प्राप्ति में संशय है। आज रेडिकलाइजेशन की हमारी क्षमता बढ़ानी होगी। जाति भिन्नता को समरसता के मूल भाव में लाना होगा। मतांतरण आज बहुत बड़ी चुनौती है । हिंदुत्व की भावना कम होने से ही ऐसा होता है । छत्तीसगढ़ की मूल विकृति वामपंथ ही है, जो कल्चरल मार्क्सनिज्म है और यही भारत को विकसित न होने देने वाली शक्ति है। हिंदुत्व का तत्वज्ञान ही मूल्य आधारित व्यवहार सीखाता है। विवेकानंद जी के हिंदुत्व व्यवहार से सम व्यवहार की भूमि का निर्माण हुआ और दुनिया भी इसकी भाषा ही समझती है।
व्यक्ति निर्माण से सामाजिक वातावरण में सामाजिक आचरण ही पूर्ण व्यवस्था का निर्माण करेगी। यह यात्रा पूर्ण करने के लिए संपूर्ण समाज को साथ चलना होगा।
उनके उद्बोधन के पश्चात भारतमाता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


इसके पूर्व इस सम्मेलन को प्रमुख अतिथियों महंत रामसुंदर दास जी महाराज , मातृशक्ति दीपिका सोनी जी, संत वेद प्रकाश जी महाराज ने भी संबोधित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। अतिथियों के द्वारा गौ पूजन किया गया।

इस विराट हिंदू सम्मेलन में समाज प्रमुख के साथ-साथ हजारों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे, जिसमें मातृ शक्तियों की संख्या सर्वाधिक थी।

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