- चौथी की परीक्षा में भगवान राम के नाम को कुत्ते के विकल्प में डालने पर मचा बवाल
- छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल की परीक्षा में बड़ी चूक, प्रश्नपत्र निरस्त
महासमुंद | क्या भगवान राम कुत्ते का नाम है ? छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी स्कूलों की कक्षा चौथी की अर्द्धवार्षिक परीक्षा के दौरान ऐसा मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक भावनाओं को झकझोर कर रख दिया। अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में भगवान राम के नाम को कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में शामिल किए जाने से जिले में हंगामा मच गया।
क्या है पूरा मामला?
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, कक्षा चौथी की अंग्रेजी परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया—
“मोना के कुत्ते का नाम क्या है?”
इस प्रश्न के विकल्पों में सामान्य नाम ‘शेरु’ के साथ ‘राम’ नाम भी दिया गया था। हिंदू धर्म के आराध्य देव भगवान राम के नाम को पशु के नाम के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किए जाने को गंभीर आपत्तिजनक और धार्मिक आस्था के अपमान के रूप में देखा गया।
प्रश्नपत्र पर उठे सवाल, विभाग सख्त
मामला सामने आते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया और विवादित प्रश्नपत्र को तत्काल निरस्त कर दिया गया। लोक शिक्षण संचालनालय ने इसे निंदनीय, असंवेदनशील और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य करार दिया है।

डीईओ पर गंभीर लापरवाही का आरोप
विभाग ने स्पष्ट किया कि कक्षा चौथी के प्रश्नपत्र का निर्धारण, परीक्षण और मुद्रण की पूरी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की थी। इसके बावजूद इस स्तर की चूक होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी गई है।
संचालनालय के अनुसार, इस गलती से न केवल सरकार और शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हुई है, बल्कि यह एक जिम्मेदार शासकीय अधिकारी से अपेक्षित आचरण के भी विपरीत है।
आचरण नियमों के उल्लंघन का हवाला
डीईओ को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है। विभाग ने इसे शासकीय मर्यादा के प्रतिकूल बताया है।
हिंदूवादी संगठनों का उग्र विरोध
मामले के तूल पकड़ते ही हिंदूवादी संगठनों ने पटेवा में जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे का घेराव किया। संगठनों ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस बीच हिंदूवादी नेता विजय महतो ने कोतवाली थाने में आवेदन देकर डीईओ समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर धार्मिक भावना आहत करने का मामला दर्ज करने की मांग की है।
डीईओ का बयान
विवाद बढ़ने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि यह प्रश्नपत्र त्रुटिवश छप गया था, जिसे निरस्त कर दिया गया है। हालांकि, इस सफाई से आक्रोशित संगठनों का गुस्सा कम होता नहीं दिख रहा।








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